माइकल न्यूटन के शोध में आत्माओं का समूहन
आत्मा के अस्तित्व और उसके अनंत सफर को समझने की दिशा में, डॉ. माइकल न्यूटन के कार्य ने एक नया आयाम खोला है। उनके लाइफ बिटवीन लाइव्स थेरेपी के माध्यम से प्राप्त हज़ारों केस स्टडीज़ से पता चलता है कि आत्माएँ अकेले नहीं, बल्कि समूहों में यात्रा करती हैं। इन्हें ही सोल ग्रुप्स और सोल फैमिलीज़ कहा जाता है। यह विचार कि हमारी आत्मा का एक विस्तृत परिवार है, जो जन्म-मरण के चक्र में साथ रहता है, आध्यात्मिक समझ को गहरा करता है। न्यूटन के शोध, विशेष रूप से ‘जर्नी ऑफ़ सोल्स’ और ‘डेस्टिनी ऑफ़ सोल्स’ पुस्तकों में, इन सोल ग्रुप्स सोल फैमिलीज़ माइकल न्यूटन की गतिशीलता का विस्तृत वर्णन मिलता है।
आत्माओं का समूह: 3 से 25 आत्माओं का गुच्छा
न्यूटन के अनुसार, अधिकांश आत्माएँ 3 से 25 सदस्यों के छोटे, अंतरंग समूहों में संगठित होती हैं। यह समूह एक प्राथमिक आध्यात्मिक इकाई है, जिसे अक्सर ‘ग्रुप ऑफ़ कॉन्शियसनेस’ या ‘सोल क्लस्टर’ कहा जाता है। ये आत्माएँ ऊर्जा, आवृत्ति और सीखने के उद्देश्यों में समानता रखती हैं। दो जीवनकालों के बीच, जब आत्मा अपने आध्यात्मिक घर में लौटती है, तो यह समूह पुनर्मिलन और ज्ञान के आदान-प्रदान का केंद्र होता है। यहाँ पर आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी अक्सर इसी बड़े समुदाय से जुड़े होते हैं, जो समूह की यात्रा में सहायता करते हैं।
एक साथ पुनर्जन्म: भूमिकाओं का नृत्य
इन सोल ग्रुप्स और सोल फैमिलीज़ की सबसे रोचक विशेषता है उनका एक साथ पुनर्जन्म लेना। वे विभिन्न जीवनकालों में एक-दूसरे के जीवन में प्रवेश करते हैं, अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं। आज का भाई, पिछले जन्म में माता या मित्र हो सकता है। एक जीवन में पति-पत्नी, दूसरे में सहकर्मी या प्रतिद्वंद्वी बन सकते हैं। इसका उद्देश्य एक-दूसरे को विभिन्न परिस्थितियों, संबंधों और चुनौतियों के माध्यम से सीखने के अवसर प्रदान करना है। यह निरंतर पुनर्मिलन हमारे सबसे गहरे, कभी-कभी तत्काल लगने वाले संबंधों की व्याख्या करता है।
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